संदेश

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले

मीर तकी मीर -पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है

आप की याद आती रही रात भर - मख़दूम

शकील बदायूँनी साहब की पुण्यतिथि पर

बोल के लब आज़ाद हैं तेरे

न होता मैं तो क्या होता

कोई मेरे दिल से पूछे , तिरे तीर-ए-नीमकश को

मेरा पहला दिन - अंसार अहमद और शरद कोकास 2.10.2009