संदेश

जाँ निसार अख़्तर - अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले

मीर तकी मीर -पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है

आप की याद आती रही रात भर - मख़दूम

शकील बदायूँनी साहब की पुण्यतिथि पर